Restoration Age: A Note



The period from 1660 to 1700 is named as the Restoration period. The people of England were suffering from tension due to strict rule of Cromwell. That is why the nation welcomed the Restoration of Charles II. In 1660 King Charles II was brought to the throne. This Restoration brought about a revolutionary change in the social life and literature of England. The following characteristics distinguish this period:
1. The Restoration: King Charles II was a thorough debauch. He was immoral. He had a number of mistresses. He was surrounded by corrupt courtiers all the time. Due to king’s carelessness and weakness corruption was rampant in all walks of life. Thus during this period integrity, spiritual zeal, moral earnestness and decorum were thrown to winds.
2. Religious and Political Quarrels: In the Restoration period we see the rise of two political parties. They were the Whigs and the Tories. The Whigs were opposing and the Tories were supporting the king. The rise of these parties gave a fresh importance to men of literary ability. Both the parties supported them. The religious controversy was also going on. It was very bitter. The Protestants and the Catholics were face to face. The nation was predominately Protestant. The Catholics were being punished. Dryden’s Absalom and Achitophel suitably reflects these religious and political conflicts of the day.
3.The Revolution: Charles' brother, James II, ascended the throne in 1685. He tried to establish Catholicism in the country. He became unpopular very soon. The entire nation rose against him. He lost his seat due to the bloodless revolution of 1688. The Restoration, the controversies and the revolution of 1688 deeply influenced the literature of the age.
4. Rise of Neo-Classicism: During the Restoration period a new literary movement started. It is known as Neo-Classical movement. This movement reflected the mood of the Century. Reason occupied an important place. The writers of this period agreed upon the rules and principles of literature. Rules and literary conventions became more important than the seriousness of the subject matter. The writers expressed superficial manners and customs of the aristocratic and urban society of that day. They did not pry into mysteries of human mind and heart. The new epoch is the antithesis of the previous Elizabethan age.
5. Imitation of the Ancient Writers: The authors of this period turned to the great classical writers. Thus grew the neo-classical school of poetry. The neo-classicists imitated the rules and ignored the importance of subject matter. They could not delve deep into human emotions. These things can be noticed in the compositions of Dryden and Pope.
6. Imitation of the French: The influence of France increased in the field of literature. Charles II and his companions demanded that poetry and drama should follow the French style. Now began the so-called period of French influence. Pascal, Racine, Boileau and other French writers were imitated blindly. The French influence is seen in the Restoration comedy of manners of Dryden, Wycherley and Congreve. This very French influence is responsible also for the growth of opera in England.
7. Realism and Formalism: The writers of the Restoration age reacted against the romanticism of Elizabethan age. They developed realism to a marked degree. The early Restoration writers presented the realistic picture of corrupt court and society. They emphasised vices rather than virtues. They gave us coarse, low plays without moral significance. They saw only the externals of man, his body and appetites. They did not see his soul and his ideals. The writers of the age followed formalism of style. They aimed at achieving directness and simplicity of expression.
8. Leading Authors: Dryden was the representative poet of this age. His Absalom and Achitophel and Mac Flecknoe are very popular satires. Samuel Butler and John Oldham are also famous for their satires. John Dryden, John Bunyan, Hobbes, Locke, Temple etc. were eminent prose writers of this age. Congreve, Etherege and Wycherley were the eminent writers of comedy of manners.
Thus the Restoration age has great importance in the literary history of England. This age offered leading authors like Dryden and Congreve whose contribution to the literature is memorable.

(1660 से 1700 तक की अवधि को पुनर्स्थापन काल कहा जाता है। क्रॉमवेल के सख्त शासन के कारण इंग्लैंड के लोग तनाव से पीड़ित थे। इसलिए राष्ट्र ने चार्ल्स द्वितीय की बहाली का स्वागत किया। 1660 में राजा चार्ल्स द्वितीय को गद्दी पर बैठाया गया। इस बहाली ने इंग्लैंड के सामाजिक जीवन और साहित्य में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया। इस काल की विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
किंग चार्ल्स द्वितीय पूरी तरह से ऐयाश था। वह अनैतिक था। उनकी कई रखैलें थीं। वह हर समय भ्रष्ट दरबारियों से घिरा रहता था। राजा की लापरवाही और कमजोरी के कारण जीवन के सभी क्षेत्रों में भ्रष्टाचार व्याप्त था। इस प्रकार इस अवधि के दौरान ईमानदारी, आध्यात्मिक उत्साह, नैतिक ईमानदारी और शालीनता हवा में उड़ा दिए गये।
पुनर्स्थापन काल में हम दो राजनीतिक दलों के उदय को देखते हैं। वे व्हिग्स और टोरीज़ थे। व्हिग्स राजा का विरोध कर रहे थे और टोरी राजा का समर्थन कर रहे थे। इन दलों के उदय ने साहित्यिक क्षमता वाले पुरुषों को एक नया महत्व दिया। दोनों पार्टियों ने उनका समर्थन किया। धार्मिक विवाद भी चल रहा था। यह बहुत कड़वा था। प्रोटेस्टेंट और कैथोलिक आमने-सामने थे। राष्ट्र मुख्य रूप से प्रोटेस्टेंट था। कैथोलिकों को दंडित किया जा रहा था। ड्राइडन का Absalom and Achitophel उस समय के इन धार्मिक और राजनीतिक संघर्षों को उपयुक्त रूप से दर्शाता है।
चार्ल्स के भाई जेम्स द्वितीय 1685 में गद्दी पर बैठे। उन्होंने देश में कैथोलिक धर्म स्थापित करने का प्रयास किया। वह बहुत जल्द अलोकप्रिय हो गए। पूरा देश उनके खिलाफ खड़ा हो गया। 1688 की रक्तहीन क्रांति के कारण उन्होंने अपनी सीट खो दी। पुनर्स्थापन, विवाद और 1688 की क्रांति ने उस युग के साहित्य को गहराई से प्रभावित किया।
पुनर्स्थापन काल के दौरान एक नया साहित्यिक आंदोलन शुरू हुआ। इसे नव-शास्त्रीय आंदोलन के रूप में जाना जाता है। यह आंदोलन सदी के मिजाज को दर्शाता है। तर्क ने एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर लिया। इस काल के लेखक साहित्य के नियमों और सिद्धांतों पर सहमत थे। विषय की गंभीरता से अधिक महत्वपूर्ण नियम और साहित्यिक परंपराएं बन गईं। लेखकों ने उस समय के कुलीन और शहरी समाज के सतही तौर-तरीकों और रीति-रिवाजों को व्यक्त किया। उन्होंने मानव मन और हृदय की भावनाओं पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। नया युग पिछले एलिज़बेथन युग से बिलकुल अलग है।
इस काल के लेखकों ने महान शास्त्रीय लेखकों का अनुसरण किया। इस प्रकार कविता के नव-शास्त्रीय विद्यालय का विकास हुआ। नियोक्लासिसिस्टों ने नियमों का अनुकरण किया और विषय वस्तु के महत्व को नजरअंदाज कर दिया। वे मानवीय भावनाओं की गहराई में नहीं उतर सके। ये बातें ड्राइडन और पोप के रचना संसार में देखी जा सकती हैं।
साहित्य के क्षेत्र में फ्रांस का प्रभाव बढ़ा। चार्ल्स द्वितीय और उनके साथियों ने मांग की कि कविता और नाटक को फ्रांसीसी शैली का पालन करना चाहिए। अब फ्रांसीसी प्रभाव की तथाकथित अवधि शुरू हुई। Pascal, Racine, Boileau और अन्य फ्रांसीसी लेखकों की आँख बंद करके नकल की गई। Dryden, Wycherley and Congreve के Restoration comedy of manners में फ्रांसीसी प्रभाव आसानी से देखा जा सकता है। यही फ्रांसीसी प्रभाव इंग्लैंड में ओपेरा के विकास के लिए भी जिम्मेदार है।
पुनर्स्थापन युग के लेखकों ने एलिज़बेथन युग के रूमानियत के खिलाफ प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने यथार्थवाद को काफी हद तक विकसित किया। प्रारंभिक पुनर्स्थापन लेखकों ने भ्रष्ट न्यायालय और समाज की यथार्थवादी तस्वीर प्रस्तुत की। उन्होंने गुणों के बजाय दोषों पर जोर दिया। उन्होंने हमें नैतिक महत्व के बिना भद्दे व तुक्ष नाटक दिए। उन्होंने केवल मनुष्य के बाहरी भाग, उसके शरीर और भूख को देखा। उन्होंने उसकी आत्मा और उसके आदर्शों को नहीं देखा। युग के लेखकों ने शैली की औपचारिकता का पालन किया। उनका उद्देश्य अभिव्यक्ति की प्रत्यक्षता और सरलता प्राप्त करना था।
Dryden व Pope इस युग के प्रतिनिधि कवि थे। Dryden के Absalom and Achitophel व Mac Flecknoe और Pope का The Rape of the Lock बहुत लोकप्रिय व्यंग्य हैं। Samuel Butler and John Oldham भी अपने व्यंग्य के लिए प्रसिद्ध हैं। John Dryden, John Bunyan, Hobbes, Locke, Temple आदि इस युग के प्रख्यात गद्य लेखक थे। Congreve, Etherege and Wycherley हास्य-व्यंग्य के प्रख्यात लेखक थे।
इस प्रकार इंग्लैंड के साहित्यिक इतिहास में पुनर्स्थापना युग का बहुत महत्व है। इस युग ने John Dryden और William Congreve जैसे प्रमुख लेखकों को प्रदान किया, जिनका साहित्य में योगदान यादगार है।)

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